अफगानिस्तान ने 2010 में अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मैच खेला था। अपने पहले मैच में आयरलैंड से हारने के बाद उसने कनाडा, आयरलैंड और स्कॉटलैंड जैसी खुद से बेहतर रैंकिंग वाली टीम को हराया। 2016 टी20 वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज को हराकर अफगानिस्तान ने पहला बड़ा उलटफेर किया। उसके बाद से इस टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2009 में अपने पहले ही वनडे मैच में स्कॉटलैंड के खिलाफ अफगानिस्तान को जीत मिली थी। अपने 15 साल के इंटरनेशनल क्रिकेट इतिहास में अफगानिस्तान को बड़ी टीमों को हराना अब उलटफेर नहीं माना जाता है।
ऑस्ट्रेलिया तक को रौंद दिया
ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड कप में हराना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता। 2011 के बाद से पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड कप में नहीं हरा पाई है। बांग्लादेश ने तो 25 साल में एक बार भी ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड कप में नहीं हराया। लेकिन अफगानिस्तान ने यह कारनामा कर दिया है। टी20 वर्ल्ड कप 2024 के मुकाबले में अफगानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को 21 रनों से हराया। बल्लेबाजी में 148 रन बनाने के बाद अफगानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को आखिरी ओवर में 127 रन ऑलआउट कर दिया। इस मैच से पहले वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने लगातार 15 जीत हासिल की थी। उसे आखिरी हार साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2023 वर्ल्ड कप में मिली थी।
तुक्का नहीं है अफगानिस्तान की जीत
अफगानिस्तान की इस जीत को तुक्का बोलना कहीं से भी सही नहीं होगा। दो बार अफगानिस्तान ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड कप में मात देने के करीब पहुंची थी। 2023 वर्ल्ड कप में मैक्सवेल 2023 वर्ल्ड कप में 292 के लक्ष्य के सामने ऑस्ट्रेलिया ने 91 रन पर 7 विकेट खो दिए थे। तब ग्लेन मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलिया को बचा लिया था। उस मैच में मजीब उर रहमान ने ग्लेन मैक्सवेल का कैच छोड़ दिया था। इस मैच में अफगानिस्तान की फील्डिंग अव्वल दर्जे की रही। 2022 टी20 वर्ल्ड कप में भी ऑस्ट्रेलिया सिर्फ चार रनों से जीत पाया था। इससे साफ है कि ऑस्ट्रेलिया पहले भी अफगानिस्तान के खिलाफ जूझी है।
सभी टीमों में अफगानिस्तान का खौफ
हर टीम में अब अफगानिस्तान को खौफ आ गया है। वनडे वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान ने इंग्लैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीमों को हराया था। ऑस्ट्रेलिया से पहले इस टी20 वर्ल्ड कप में उसने न्यूजीलैंड को हराया। जनवरी में बेंगलुरु में हुए टी20 मैच में राशिद खान के बिना खेल रही अफगानिस्तान को हराने में भारत को दो सुपर ओवर लग गए थे। भारत को छोड़कर अफगानिस्तान की टीम ने सभी टेस्ट प्लेइंग देशों को इंटरनेशनल क्रिकेट में हरा दिया है।
अफगानिस्तान ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को हराया:वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा उलटफेर,
149 रन चेज नहीं कर सके कंगारू; जीत के 4 हीरो
राशिद खान की कप्तानी में अफगानिस्तान ने टी-20 वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा उलटफेर किया। एक बार टी-20 और 6 बार वनडे वर्ल्ड कप जीत चुकी ऑस्ट्रेलिया को अफगानिस्तान ने सुपर-8 मैच में हरा दिया है। क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में ऑस्ट्रेलिया पर अफगानिस्तान की यह पहली जीत है।
वेस्टइंडीज के किंग्सटाउन में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मिशेल मार्श ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी और अफगानिस्तान की टीम को 148 रन पर रोक दिया। लेकिन गुलबदीन नाइब ने 4 विकेट लेकर कंगारुओं से जीत छीन ली। ऑस्ट्रेलिया 127 रन पर ऑलआउट हो गई।
इस मैच में सबकुछ हुआ। हैट्रिक लगी, रनआउट के चांस छूटे, फील्डर्स ने असंभव से कैच पकड़े। पहली गेंद से आखिरी गेंद तक किसी क्रिकेट फैन की नजर मैच से हटी नहीं। और नतीजे ने सभी को चौंका दिया।
गुलबदीन नाइब: राशिद खान ने जब गुलबदीन नईब को गेंदबाजी दी, तब तक वे 7 गेंदबाजों को आजमा चुके थे। ऑस्ट्रेलिया 10 ओवर में 70 रन बना चुका था। ग्लेन मैक्सवेल 31 और मार्कस स्टोइनिस 11 रन बनाकर जम चुके थे। तीसरी ही गेंद पर गुलबदीन ने शॉर्ट बॉल पर स्टोइनिस का विकेट लिया। स्टोइनिस को इतने ज्यादा बाउंस की उम्मीद नहीं थी, उन्होंने शॉट खेला और गेंद हवा में चली गई। विकेटकीपर रहमानुल्लाह गुरबाज ने अच्छा कैच पकड़ा। गुलबदीन 13वां ओवर लेकर आए तो टिम डेविड को इनस्विंगर पर अपना शिकार बनाया। DRS में टिम डेविड LBW आउट करार दिए गए। 15वें ओवर में गुलबदीन ने ऑस्ट्रेलिया को सबसे बड़ा झटका दिया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को जीत की ओर ले जा रहे ग्लेन मैक्सवेल को आउट किया। नूर अहमद ने बैकवर्ड पॉइंट पर उनका शानदार कैच लपका। 17वें ओवर में गुलबदीन ने पैट कमिंस को बोल्ड कर जीत की उम्मीदें खत्म कर दीं। गुलबदीन ने 4 ओवर में सिर्फ 20 रन दिए और 4 विकेट लिए।
जीत के हीरो
रहमानुल्लाह गुरबाज: अफगानी ओपनर गुरबाज ने 60 रन की पारी खेली। 49 गेंदों पर खेली गई इस पारी का स्ट्राइक रेट 122 का था। गुरबाज ने 4 चौके और 4 सिक्स लगाए। अफगानिस्तान को फाइटिंग टोटल तक पहुंचाने में गुरबाज का बड़ा रोल रहा।
अफगानिस्तान की जीत की वजह
- रहमानुल्लाह गुरबाज-इब्राहिम जादरान की पार्टनरशिप अफगानिस्तान के दोनों ओपनर्स ने फिफ्टी लगाई। दोनों के बीच 118 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप हुई। 95 गेंदों पर आई ये साझेदारी थोड़ी धीमी थी, लेकिन अफगानिस्तान की टीम को फाइटिंग टोटल तक पहुंचा दिया। इन दोनों के अलावा कोई भी बैटर 13 से ज्यादा रन नहीं बना पाया।
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- राशिद की कप्तानी, 8 गेंदबाज इस्तेमाल किए, विकेट मिले 149 का स्कोर डिफेंड करने के लिए काफी छोटा था, क्योंकि सामने ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम थी। इसके बावजूद राशिद खान ने कोशिश नहीं छोड़ी। एक्सपेरिमेंट करते रहे। पहला ओवर नवीन को दिया, फारुकी को नहीं। पावरप्ले में स्पिनर लाए। राशिद ने 8 गेंदबाजों का इस्तेमाल किया। ऑस्ट्रेलिया की टीम 12 ओवर तक रनरेट में नहीं पिछड़ी थी, लेकिन विकेट लगातार गिर रहे थे। इसके चलते ही ऑस्ट्रेलिया की टीम आखिर में मुश्किल में आ गई।
- फील्डिंग में किया कमाल अफगानिस्तान के फील्डर्स ने एक चौका छोड़ा। रनआउट के 2 मौके गंवाए, लेकिन गेंद जब भी हवा में गई तो कैच पकड़ा। इसमें रहमानुल्लाह गुरबाज का मार्कस स्टोइनिस का कैच। इसके बाद नूर अहमद का मैक्सवेल का कैच बेहद अहम रहे। करीम जनत ने भी ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर मैथ्यूवेड का शानदार कैच लिया। अफगानिस्तान की जीत में उनकी फील्डिंग का रोल बहुत बड़ा है।
टर्निंग पॉइंट
ग्लेन मैक्सवेल का विकेट 14वां ओवर गुलबदीन फेंक रहे थे। सामने थे मैक्सवेल जो 59 रन बनाकर खेल रहे थे। मैक्सवेल ही ऐसे बल्लेबाज थे, जो तेजी से रन बना रहे थे और लगातार ऑस्ट्रेलिया को जीत की ओर ले जा रहे थे। गुलबदीन ने चौथी गेंद आउट स्विंगर फेंकी, मैक्सवेल ने पॉइंट की तरफ चौका लगाने के लिए शॉट खेला। मैक्सवेल का शॉट हवा में बैकवर्ड पॉइंट की ओर गया। यहां नूर अहमद खड़े थे, जिन्होंने गेंदबाजी में कोई कमाल नहीं दिखाया पर इस गेंद पर उन्होंने कसर पूरी कर दी। नूर ने फॉरवर्ड डाइव मारते हुए मैक्सवेल का कैच पकड़ा। ये विकेट ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे बड़ा झटका था, क्योंकि इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के पास रेगुलर बैटर्स नहीं बचे। -
दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन
ऑस्ट्रेलिया: मिचेल मार्श (कप्तान), डेविड वॉर्नर, ट्रैविस हेड, ग्लेन मैक्सवेल, मार्कस स्टोयनिस, टिम डेविड, मैथ्यू वेड (विकेट कीपर), पैट कमिंस, एश्टन एगर, एडम जम्पा और जोश हेजलवुड।अफगानिस्तान: राशिद खान (कप्तान), रहमानुल्लाह गुरबाज, इब्राहिम जादरान, गुलबदीन नाइब, अजमतुल्लाह ओमरजई, मोहम्मद नबी, नजीबुल्लाह जादरान, करीम जनत, नांगेयालीअ खरोटे, नूर अहमद, नवीन-उल-हक और फजलहक फारूकी।



