इंग्लैंड की टीम जब से पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारत पहुंची, तभी से यह सवाल बार-बार उठ रहा था कि क्या उसकी आक्रामक रणनीति यहां की पिचों पर काम करेगी?फिर हैदराबाद टेस्ट शुरू होता है। इस मुकाबले के शुरुआती 2 दिनों के बाद सवालों की फेहरिस्त लंबी हो गई। मसलन…क्या स्टोक्स की कप्तानी अच्छी है? क्या इंग्लैंड के स्पिनर भारत में चल पाएंगे? क्या इंग्लैंड ने सही प्लेइंग-11 सिलेक्ट की है?
इसके बाद दो दिन और खेल हुआ और बेन स्टोक्स की टीम ने सबको चौंकाते करते हुए मुकाबला जीत लिया। ऐसा क्या हुआ इन दो दिनों में जिससे बाजी पूरी तरह पलट गई। जो फैसले बेन स्टोक्स के ब्लंडर कहे जा रहे थे, वे मास्टर स्ट्रोक में कैसे बदल गए। इसी कहानी को 4 पॉइंट्स में समझते हैं।
1. प्लेइंग-11 का चुनाव
इंग्लैंड ने इस टेस्ट के लिए तीन स्पेशलिस्ट स्पिनर्स को सिलेक्ट किया। इंग्लिश टीम इतिहास में पहली बार सिर्फ एक फास्ट बॉलर के साथ उतरी। स्टोक्स के इस फैसले की बहुत आलोचना हो रही थी, लेकिन,् मैच खत्म होते-होते यह साफ हो गया कि इस पिच पर दूसरा फास्ट बॉलर किसी काम का नहीं होता।
भारत के लिए भी एक तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने जरूर 6 विकेट लिए, लेकिन दूसरे पेसर मोहम्मद सिराज दो पारियों को मिलाकर एक भी विकेट नहीं ले पाए। खुद इंग्लैंड के इकलौते फास्ट बॉलर मार्क वुड एक भी विकेट नहीं ले सके।
2. पिटाई लगने के बावजूद हार्टले से कराते रहे बॉलिंग
भारत की पहली पारी में स्टोक्स ने मार्क वुड के साथ नई गेंद युवा लेफ्ट आर्म स्पिनर और डेब्यूटैंट टॉम हार्टले को थमाई। हार्टले खूब महंगे साबित हो रहे थे। यशस्वी जायसवाल ने उनके खिलाफ चौकों की झड़ी लगा दी। इसके बावजूद स्टोक्स हार्टले से गेंदबाजी कराते रहे। पहली पारी में उन्होंने 25 ओवर में 131 रन देकर सिर्फ दो विकेट झटके।
हालांकि पहली पारी का महंगा अनुभव हार्टले के लिए भारत की दूसरी पारी में काम आया। इस बार वे लगभग अनप्लेबल हो गए। इस बार भारत के पहले पांच में से चार विकेट उन्होंने ही झटके। अंततः इस पारी में उन्हें सात विकेट मिले।
3. भारतीय स्पिनर्स पर अटैक जारी रखना
इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 246 रन पर ऑलआउट हो गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यह दुर्गति ओवर अटैकिंग के कारण हुई। इसके बावजूद दूसरी पारी में भी इंग्लिश बल्लेबाजों ने अप्रोच नहीं बदला और भारतीय स्पिनर्स पर अटैक जारी रखा। नतीजा यह हुआ कि भारत को विकेट मिलते रहे, लेकिन इंग्लैंड तेजी से रन बनाने में भी कामयाब हुआ।
इंग्लैंड की दूसरी पारी में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा दोनों ने 125-125 रन से ज्यादा खर्च किए। कुल मिलाकर दूसरी पारी में भारत के तीन स्पिनर्स के खिलाफ इंग्लैंड ने 79 ओवर की बैटिंग की और 6 विकेट के एवज में 341 रन बना दिए।
दिए।

4. अबुधाबी में प्रैक्टिस करना, अभ्यास मैच न खेलना
बेन स्टोक्स का एक मास्टर स्ट्रोक फैसला ऐसा रहा जो उन्होंने भारत आने से पहले ही ले लिया था। इंग्लैंड की टीम ने भारत में प्रैक्टिस मैच खेलने से इनकार कर दिया। तर्क यह था कि प्रैक्टिस मैच में जैसी पिच मिलती है, टेस्ट मैच की पिच उसके उलट होती है। वाकई ऐसा होता भी है।
इंग्लैंड ने इसकी जगह अबुधाबी में 10 दिन का कैंप लगाया और भारतीय पिचों से मिलती-जुलती पिच पर जमकर प्रैक्टिस की। पहले टेस्ट मैच से साफ है कि यह रणनीति कामयाब रही।



