नई दिल्ली|
पेरिस ओलिंपिक गेम्स-2023 से पहले भारतीय निशानेबाजी एक बाद फिर विवादों में है। गुरुवार को दिग्गज पिस्टल निशानेबाज और मनु भाकर के निजी कोच जसपाल राणा ने दावा किया कि भारतीय टीम के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर पिएरे ब्यूचैम्प ने उन्हें दिल्ली की डॉ. कर्णी सिंह रेंज से बाहर जाने के लिए कह दिया। जसपाल के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामले में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर के पक्ष में है। जब पेरिस ओलिंपिक गेम्स के लिए 6 महीने का समय बचा है, तो शूटिंग में फिर विवाद खड़ा हो गया।
47 साल के जसपाल राणा ने बताया- ‘हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर दिल्ली की रेंज में मुझसे बदतमीची कर रहे थे और मुझे रेंज से बाहर भगा दिया।’ इस पर NRAI के सचिव राजीव भाटिया ने कहा- ‘NRAI ने सभी खिलाड़ियों और कोच के लिए एक SPO बनाई है, जिसका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है, लेकिन राणा ऐसा नहीं कर रहे थे और रेंज के प्रतिबंधित एरिया में जा रहे थे। उन्होंने SPO पर साइन भी नहीं किए। सभी को SOP का पालन करना चाहिए।’
पिछले ओलिंपिक से पहले भी हुआ था विवाद
अर्जुन अवॉर्डी राणा का टोक्यो ओलिंपिक गेम्स-2020 से ठीक पहले भी मनु भाकर के साथ विवाद हो गया था। यह विवाद इतना बढ़ा कि ओलिंपिक गेम्स से भारतीय निशानेबाजों को खाली हाथ लौटना पड़ा था।
पिछले 2 ओलिंपिक से खाली हाथ लौट रहे भारतीय निशानेबाज
भारतीय निशानेबाज पिछले दो ओलिंपिक गेम्स से खाली हाथ लौट रहे हैं। भारत को ओलिंपिक गेम्स में शूटिंग का आखिरी मेडल साल 2012 में मिला था। तब विजय कुमार ने सिल्वर हासिल किया था। इससे पहले, भारत ने 2004 और 2008 ओलिंपिक गेम्स में भी शूटिंग के मेडल जीते थे।
राणा बोले- मैं काफी दूर खड़ा था, मुझे धमकी दी
राणा ने कहा- ‘जहां शूटर्स अभ्यास कर रहे थे, मैं उससे काफी दूर खड़ा था, लेकिन वे मेरे पास आए और मुझे कहा कि मैं वहां नहीं खड़ा हो सकता और मुझे रेंज छोड़कर जाना होगा, वर्ना मैं NRAI के साथ मुश्किल में फंस जाऊंगा।
मैंने कहा कि मेरे बारे में चिंता मत करो। मैं अर्जुन पुरस्कार विजेता हूं और राष्ट्रीय कोच भी रह चुका हूं। लेकिन उन्होंने कहा कि लेकिन तुम अभी राष्ट्रीय कोच नहीं हो, तो कृपया चले जाओ। वे मुझे रोकने वाला है कौन? उसकी पृष्ठभूमि क्या है। ’
फॉरेन कोच के सपोर्ट में आया NRAI
इस मामले में नेशनल एसोसिएशन ने कहा- ‘SOP का खेल के बेहतर हित में पालन किया जाना चाहिए। निशानेबाजी ने आगामी ओलिंपिक के लिए रिकॉर्ड कोटे हासिल किए हैं। खिलाड़ियों और कोच व सहयोगी स्टाफ की कड़ी मेहनत के साथ हाई परफोरमेंस निदेशक का योगदान भी अहम रहा है। निशानेबाजों और निजी कोच को शिविर और प्रतियोगिताओं के दौरान SOP का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जाती है जो खेल के बेहतर हित में होगा।’


