सोनीपत/महिला पहलवानों के यौन शोषण केस में सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण भी कोर्ट में मौजूद रहे। इस दौरान बृजभूषण के वकीलों ने चार्ज फ्रेम करने की दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर अपनी दलीलें रखीं। केस की अगली सुनवाई अब 19 अक्टूबर को दोपहर ढाई बजे होगी।
सुनवाई के दौरान बृजभूषण के वकील ने कहा कि केंद्रीय खेल मंत्रालय की बनाई ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को केंद्र सरकार ने भेजी थी। वह भी इस चार्जशीट का हिस्सा है। पहलवानों ने पहले कोई आरोप नहीं लगाया।
पहलवानों की खेल मंत्री से मुलाकात हुई, उसके बाद ओवरसाइट कमेटी बनी। बृजभूषण के वकीलों ने कहा कि इस मामले में कॉस्मेटिक तरीके से शिकायत दर्ज कराई गई। जिसमें सेक्शुअल हैरेसमेंट की जगह छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए थे।
पिछली सुनवाई में भी वकीलों ने किया था विरोध
7 अक्टूबर को पिछली सुनवाई में बृजभूषण के वकीलों ने दिल्ली पुलिस के चार्जशीट में लगाए आरोपों का विरोध किया था। उनका कहना था कि सिर्फ पहलवानों के बयान पर बृजभूषण के ऊपर चार्ज फ्रेम नहीं किए जा सकते।
बृजभूषण के वकील ने कहा था कि सभी महिला पहलवानों ने एक ही तरह का आरोप लगाया है कि बृजभूषण सांस चेक करने के बहाने उन्हें गलत तरीके से छूते थे। इसको लेकर धरना दिया लेकिन किसी ने यह मांग नही की कि महिला पहलवानों के सांस चेक करने वाले नियम को ही खत्म कर देना चाहिए।
एक पहलवान ने बयान भी बदला
उन्होंने कहा कि आरोपी पर चार्ज फ्रेम करते समय आरोपों की जांच नहीं हो सकती। इनमें एक पहलवान ने बृजभूषण के खिलाफ अपने बयान भी बदले हैं। पहलवानों को लगता है कि उनके आरोपों के आधार पर चार्ज फ्रेम हो जाएंगे।
बृजभूषण को जमानत मिल चुकी
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने 20 जुलाई को बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के निलंबित सहायक सचिव विनोद तोमर को जमानत दे दी थी। दिल्ली पुलिस ने 15 जून को कोर्ट में 6 बार के सांसद बृजभूषण के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल), धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न), धारा 354 डी (पीछा करना) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था।
