नई दिल्ली । डेविस कप के दूसरे राउंड में भारत का सामना साउथ कोरिया की टीम से होगा, जिसमें टीम इंडिया की नजरें अंतिम-8 में पहुंचने पर रहने वाली हैं। भारतीय दल का हिस्सा और युवा खिलाड़ी दक्षिणेश्वर सुरेश का साउथ कोरिया के खिलाफ होने वाले मुकाबले से पहले तैयारियों को लेकर बड़ा बयान सामने आया है।
दक्षिणेश्वर सुरेश जिनको डीके सुरेश के नाम से पहचाना जाता है उन्होंने पहले राउंड में नीदरलैंड्स के खिलाफ अपने मुकाबले जीतने के साथ भारतीय टीम को दूसरे राउंड में पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की थी। साउथ कोरिया के खिलाफ भारतीय टीम को 18 और 19 सितंबर को मुकाबले खेलने हैं, जिसमें डीके सुरेश ने जिसमें उन्होंने इंडिया टीवी के स्पोर्ट्स एडिटर समीप राजगुरु से खास बातचीत में वहां के हालात और तैयारियों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दिया।
हम यहां काफी पहले आ गए थे, जिसमें पिछले कुछ दिनों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं
डीके सुरेश ने तैयारियों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि हम सभी यहां काफी पहले आ गए थे। जाहिर है एक नई जगह पर, दूर खेलते हुए आपको कोर्ट, परिस्थितियों, खाने, सब चीजों के अनुकूल ढलना पड़ता है, सब कुछ अलग होता है? खासकर खाने की बात करें तो हम इस तरह का खाना खाने के आदी नहीं हैं। तो जल्दी आना और इन चीजों का आदी होना बहुत बड़ी बात है, क्योंकि रिकवरी मायने रखती है। आपके पास अच्छा खाना, अच्छी रिकवरी, अच्छी नींद होनी चाहिए और बाकी सब चीजें उसके बाद आती हैं। हम यहां पिछले कुछ दिनों से हैं और हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं, गेंदों और कोर्ट के अनुसार ढल रहे हैं जैसा कि मैंने कहा। तैयारी के नजरिए से हम बहुत अच्छा कर रहे हैं और हमारे पास हमारी देखभाल के लिए फीजियो हैं, कोच, कप्तान हर कोई हमें बेहतर बनाने में सपोर्ट करने के लिए पीछे मौजूद है। यहां हमारी तैयारी बहुत अच्छी चल रही है।
मुझे लगता है कि साउथ कोरिया के खिलाड़ी काफी सॉलिड गेम खेलते हैं
साउथ कोरिया के खिलाड़ियों को लेकर सवाल पूछे जाने पर डीके सुरेश ने कहा कि एशियाई खिलाड़ियों की बात करें तो वे काफी हद तक मुझे लगता है कि वह सभी बहुत ही सॉलिड और निरंतर गेम खेलते हैं। यहां की परिस्थितियाँ काफी धीमी हैं, हम सभी तैयारी कर रहे हैं और अच्छा महसूस कर रहे हैं। टेनिस में आपको लगभग हर हफ्ते एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है। तो बस तैयारी के बारे में मैं कहूंगा कि इसे उसी तरह लें, बस जगह के हिसाब से ढल जाएं, कोर्ट, बॉल्स, खाना हर चीज मायने रखती है। हम बस वही सब कर रहे हैं जो हम प्रो टूर पर हमेशा करते हैं।
कोरिया के पास शानदार खिलाड़ी हैं जो टॉप-100 में हैं
डीके सुरेश ने साउथ कोरिया के खिलाड़ियों से मिलने वाली चुनौतियों को लेकर सवाल पूछे जाने पर कहा कि वह राउंड ऑफ 16 में खेलते हुए वे यहां तक पहुंचे हैं, जाहिर है वे अच्छे खिलाड़ी हैं, जिसमें कुछ महान खिलाड़ी थे जो टॉप 100 में खेले हैं और हां, उनके पास अनुभव भी है। हम बस वहां जाने वाले हैं और देश की उम्मीदों को अपने कंधों पर उठाने वाले हैं, वहां होने पर गर्व महसूस करने वाले हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाले हैं और देखते हैं कि क्या होता है।
मुझे अपने गेम पर भरोसा था
नीदरलैंड्स के खिलाफ पहले राउंड में डीके सुरेश से उनके शानदार प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जाहिर तौर पर टॉप 100 का लेवल पूरी तरह से अलग है, लेकिन मैं बस वहां गया और मुझे अपने गेम पर भरोसा था। मेरे पास बड़ी सर्व और रीच है और मैं एक बड़ा गेम स्टाइल खेलता हूं तो साफ है कि विरोधी को ज्यादा लय ना देना उसे थोड़ी मुश्किल में डाल देगा। अगर मैं अपनी ताकतों के साथ खेलता हूं तो मुझे लगता है कि मैं किसी को भी हरा सकता हूं। दिन के अंत में सब कुछ विश्वास का खेल है। आप बस कोर्ट पर कदम रखते हैं और फिर आपको विश्वास करना होता है, लेकिन अगर आप झिझकेंगे तो काम नहीं बनेगा।
मुझे यह लंबाई मिलने के लिए मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं
भारतीय टेनिस खिलाड़ियों की औसत लंबाई लगभग 5’5″ या 5’6 होती तो वहीं डीके सुरेश की लंबाई 6 फीट 6 इंच है जिसमें उनकी इस लंबाई को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर आप अधिकतर टॉप टेनिस खिलाड़ियों को भी देखें तो उनकी भी लंबाई लगभग 6 फीट से ऊपर है, मैं इतना लंबा होने के मामले में किस्मत वाला रहा क्योंकि मेरे माता-पिता और मेरे दादा-दादी काफी लंबे थे। मैं अपनी ताकत पर काम कर रहा था जहाँ सर्व मेरे लिए बड़ी चीज है क्योंकि मेरी लंबाई को देखते हुए मुझे इसका अच्छा इस्तेमाल करना होगा। इसलिए मैंने अन्य भारतीय खिलाड़ियों की तुलना में एक अलग तरीके से ट्रेनिंग की क्योंकि साफ है मैं कोर्ट के चारों ओर दौड़ने और संघर्ष करने वाला छोटा लड़का नहीं हूं।
अमेरिका में कॉलेज टेनिस का लेवल काफी बेहतर है
डीके सुरेश ने अमेरिकन कॉलेज टेनिस सिस्टम को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि वहां पर कॉलेज टेनिस का लेवल वैसा नहीं है जैसा लोग सोचते हैं कि कॉलेज टेनिस कैसा होता है। साफ है भारत में कॉलेज टेनिस बड़ा नहीं है, लेकिन अमेरिका में लेवल बहुत हाई है। मैं कहूंगा कि लगभग सभी टॉप टीमों के टॉप खिलाड़ी चैलेंजर्स में लगातार हिस्सा ले रहे हैं। इसलिए मुझे हर हफ्ते ऐसे खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिल रहा है जो दुनिया के टॉप 200, टॉप 300 में हैं।
मानसिक मजबूती बहुत सारे मैच खेलकर अनुभव के साथ आती है
मानसिक पहलू को लेकर डीके सुरेश ने पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि निश्चित रूप से बहुत सारे मैच खेलकर, यह अनुभव के साथ आता है। साफ है कि शारीरिक रूप से फिट होना भी खेलों में एक बड़ी बात है। जब तक आप अपने शरीर को स्वस्थ रखते हैं, मुझे लगता है कि आप जितने अधिक मैच खेलेंगे, उतना ही अधिक अनुभव आपको मिलेगा क्योंकि आप अलग-अलग हालात में, अलग-अलग परिस्थितियों में, अलग-अलग देशों में होंगे। तो अंततः मुझे लगता है कि आप सीखेंगे कि उन स्थितियों को कैसे संभालना है। मैं कहूँगा कि टेनिस में लगभग हर कोई बहुत अच्छा खेल सकता है, लेकिन टॉप खिलाड़ियों और 100 से बाहर के खिलाड़ियों के बीच का छोटा सा अंतर है जो मानसिक पहलू है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि निराशा से कौन जल्दी वापसी कर सकता है।
रोजर फेडरर हैं मेरे पसंदीदा खिलाड़ी
डीके सुरेश ने उनके पसंदीदा खिलाड़ी को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं बस रोजर फेडरर को पसंद करता हूं और उन्हें खेलते देखना चाहता हूं। वह खेल को इतना आसान बना देते हैं कि आप बस देखते रह जाते हैं। रोजर कोर्ट के बाहर अच्छे इंसान हैं। हर कोई उनकी तरह बनना चाहता है।


