नई दिल्ली: भारतीय पुरूष और महिला हॉकी टीमें अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच विश्व कप में पारंपरिक नीली जर्सी नहीं बल्कि केसरिया रंग की जर्सी पहनेगी । जर्सी का रंग बदलने के इस फैसले पर विवाद के बाद हॉकी इंडिया ने कहा है कि कोचों और खिलाड़ियों के अनुरोध पर तकनीकी कारणों से यह फैसला लिया गया है ।
पूर्व कप्तान ने उठाया सवाल
इस फैसले पर हालांकि पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा ने सवाल उठाते हुए कहा है कि हॉकी टीम बरसों से नीली जर्सी में खेलती आई है और प्रशंसक भी उसे इसी रंग में देखना चाहते हैं ।
हॉकी इंडिया का बयान
विवाद के बाद हॉकी इंडिया ने एक बयान में कहा, ‘यह देखा गया कि नीली जर्सी नीले रंग की एस्ट्रो टर्फ (मैदान की सतह) के साथ घुल-मिल जाती थी जबकि अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों के लिए नीला रंग ही अब मानक है। इस एक जैसे रंग की वजह से खिलाड़ियों को मैदान पर साफ देखने में दिक्कत होती थी।’
सोच विचार के बाद चुना केसरिया रंग
इसमें कहा गया ‘कोचों और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया जैसे दूसरे रंगों का सुझाव दिया। अच्छी तरह सोच विचार के बाद केसरिया रंग को चुना गया। तकनीकी जरूरत को पूरा करने के अलावा केसरिया रंग का गहरा महत्व भी है क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में से एक है और साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।’’
कोचों और खिलाड़ियों के फीडबैक से लिया फैसला
इसमें कहा गया ,‘‘ कोचों और खिलाड़ियों से तकनीकी फीडबैक मिलने और हमारे राष्ट्रध्वज का रंग होने से इस रंग के सांकेतिक महत्व को देखते हुए यह फैसला किया गया ।’’
रंग बदलने का कारण सिर्फ तकनीकी
जर्सी विवाद के राजनीतिक रंग लेने के बीच हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी के कहने पर नहीं बल्कि सिर्फ तकनीकी कारणों से लिया गया।
रंग बदलने के लिए कोई दबाव नहीं
टिर्की ने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जर्सी का रंग बदलने के लिए किसी का दबाव नहीं था । यह सिर्फ खिलाड़ियों , कोचों और सहयोगी स्टाफ के अनुरोध पर किया जा रहा है । इसका कारण पूरी तरह से तकनीकी है । मैं अनुरोध करता हूं कि टूर्नामेंट से पहले ऐसा कोई अनावश्यक विवाद नहीं हो जिससे टीम और खिलाड़ियों पर असर हो ।


