नई दिल्ली: इंडिया ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए मुकाबले में हुआ ड्रामा चर्चा का विषय बन गया है। मैच टाई होने के बाद अंपायर्स के फैसलों और मैदान पर हुई खिलाड़ियों की धक्का-मुक्की ने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है। लेकिन इस पूरे विवाद के बीच फैंस के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शाम के 6 बज चुके थे और मैदान पर लगातार अंधेरा बढ़ रहा था, तो सुपर ओवर के दौरान स्टेडियम की फ्लडलाइट्स चालू क्यों नहीं की गई? जबकि मैदान पर फ्लडलाइट्स मौजूद थे। आइए टूर्नामेंट के नियमों की मदद से समझते हैं कि आखिर अंपायर्स ने लाइट ऑन क्यों नहीं की और क्यों भारतीय टीम को उस अंधेरे में खेलने पर मजबूर होना पड़ा।
टूर्नामेंट का सख्त नियम बना कारण
इस ट्राई-नेशन सीरीज के नियमों के मुताबिक, मैचों का आयोजन पूरी तरह से नेचुरल डे-लाइट में ही किया जाना था। इस पूरे टूर्नामेंट के लिए यह पहले से तय था कि परिस्थितियों को दोनों टीमों के लिए एक जैसा रखने के लिए फ्लडलाइट्स का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाएगा। यही वजह थी कि शाम के 6 बजने के बाद जब मैच टाई हुआ, तो अंपायर्स खुद कन्फ्यूजन में आ गए। वे असमंजस में थे कि क्या इस टूर्नामेंट के नियमों के तहत सुपर ओवर कराया भी जा सकता है या नहीं, क्योंकि मैदान पर लाइट ऑन करने की अनुमति नहीं थी।
कप्तान तिलक वर्मा की नाराजगी की असली वजह
भारतीय कप्तान तिलक वर्मा अंपायर्स से इसी बात को लेकर बुरी तरह भड़के हुए थे। तिलक का मानना था कि जब नियम के मुताबिक लाइट ऑन नहीं की जा सकती और मैदान पर बैड लाइट के कारण गेंद को देख पाना मुश्किल हो रहा है, तो सुपर ओवर कराना खिलाड़ियों के लिए खतरनाक हो सकता है। तिलक श्रीलंका ए के कप्तान के साथ मिलकर लाइट मीटर की रीडिंग भी चेक कर रहे थे। भारतीय खेमे की दलील थी कि ऐसी स्थिति में दोनों टीमों को 1-1 अंक बांटकर मैच खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि अंधेरे में बिना फ्लडलाइट्स के खेलना अनुचित है। लेकिन अंपायर्स ने उनकी एक न सुनी और मैच को जबरन सुपर ओवर में खींच ले गए।


