नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम जब भी इंटरनेशनल क्रिकेट में खराब प्रदर्शन करती है तो इसमें सबसे पहले हेड कोच को लपेटा जाता है जो सभी के निशाने पर रहता है। वहीं यदि टीम गलती से अच्छा प्रदर्शन करती है तो कोच को छोड़कर बाकी सभी की तारीफ भी देखने को मिलती है। अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के वर्क कल्चर को लेकर गैरी कर्स्टन का बड़ा बयान सामने आया है।
साल 2011 में जब टीम इंडिया ने वनडे वर्ल्ड कप को अपने नाम किया था तो उस समय हेड कोच की जिम्मेदारी गैरी कर्स्टन ही संभाल रहे थे। वहीं गैरी कर्स्टन ने साल 2024 के टी20 वर्ल्ड कप से पहले पाकिस्तानी टीम के लिए लिमिटेड ओवर्स में हेड कोच की जिम्मेदारी को संभाली थी, लेकिन उन्हें ये पद सिर्फ 6 महीनों के अंदर ही छोड़ने का फैसला लेना पड़ा। अब गैरी ने अपने अनुभव को शेयर किया है और इसमें पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड की असली तस्वीर भी उन्होंने सामने लाने की कोशिश की है।
वहां पर काम करने का माहौल काफी टॉक्सिक है
गैरी कर्स्टन ने लगभग 6 महीने के लिए पाकिस्तानी टीम के लिए लिमिटेड ओवर्स फॉर्मेट में हेड कोच की पोजीशन को संभाला था, जिसके बाद उन्होंने वहां के वर्क कल्चर को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। गैरी कर्स्टन ने अब talkSPORT Cricket के साथ बातचीत करते हुए पाकिस्तानी टीम के हेड कोच रहते हुए अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि वहां पर काम करने का माहौल काफी टॉक्सिक है। पाकिस्तान में जिस बात ने मुझे शायद सबसे ज्यादा हैरान किया, वह थी काफी ज्यादा दखलंदाजी। मुझे नहीं लगता कि मैंने पहले कभी इस तरह की बाहरी दखलंदाजी टीम के अंदर देखी है। क्या इससे मुझे हैरानी हुई? मुझे नहीं पता, लेकिन यह सच में काम करने के लिए बिल्कुल भी अच्छी स्थिति नहीं थी। एक कोच के लिए इस स्थिति में काम करना और भी मुश्किल हो जाता है कि वह अपने खिलाड़ियों से किस तरह बातचीत कर सकता है जब बाहर से इतनी अधिक दखलअंदाजी हो रही।
आखिर कोच रखने की जरूरत ही क्या
पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के वर्क कल्चर को लेकर गैरी कर्स्टन ने आगे कहा कि जब टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही होती है तो सबसे पहले कोच ही निशाने पर आता है। सभी तरफ से एक ही चीज बोली जाती है कि चलो कोच को हटा देते हैं, क्योंकि ये सबसे आसान चीज होती है। अगर आपको यही करना है तो फिर कोच को रखा ही क्यों जाए। पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी के कार्यकाल में आपके लिए लगातार कामयाबी हासिल करना लगभग नामुमकिन था।


