14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 बॉल पर शतक जमाया। उन्होंने 38 बॉल की पारी में 7 चौके और 11 छक्के लगाए। उनकी यह पारी कई वर्षों की मेहनत का फल है। वे हर अपने शॉट को परफेक्ट करने के लिए हर दिन 400 से 450 शॉट खेलते थे।
ऐज फ्रॉड के सवाल पर कहा- ऐज पर सवाल उठाना बंद करो ऐज फ्रॉड से जुड़े सवाल पर वैभव के कोच ने कहा कि उनकी ऐज को लेकर सवाल उठाना बंद करें। वे देश का एसेट हैं। हम सबकी जिम्मेदारी है कि उसे संभालें। उन्हें BCCI से क्लीन चिट मिल चुकी है। बोर्ड ने उसे ऐज ग्रुप में खेलने का मौका दिया।
BCCI इतनी बड़ी संस्था हैं, वह गलत रहता तो उसे खेलने का मौका नहीं मिलता। उसने सारे डॉक्यूमेंट्स प्रूफ दिए हैं। इतना ही नहीं, उसका बोन टेस्ट भी हो चुका है। वहां से भी क्लियरेंस मिल चुकी है। भारत में सभी को सवाल करने की आजादी है। अब हर किसी को प्रूफ तो नहीं देंगे। मैं वैभव से भी यही कहना चाहूंगा कि वह अपने खेल पर फोकस करें। इन सब चीजों पर ध्यान न दें।
समस्तीपुर से पटना आकर 5 से 6 घंटा प्रैक्टिस करते थे वैभव कोच ने बताया कि वैभव समस्तीपुर से एक दिन का गैप करके प्रैक्टिस के लिए पटना आते थे। वे 7.30 बजे मेरे पास पटना आ जाते थे। यहां अकादमी में वह 5 से 6 घंटे प्रैक्टिस करते थे। वे रोजाना 400 से 450 बॉल पर शॉट खेला करते थे। इसमें नेट सेशन, थ्रो डाउन, बॉलिंग मशीन और स्पेशली टारगेटिंग बॉलिंग सेशन होता था।
जब यहां नहीं आते थे, तब घर पर ही प्रैक्टिस करते थे। पिता उसके क्रिकेट खेले हैं, उनके पास बेसिक नॉलेज है। ऐसे में प्रैक्टिस में हम जो करवाते थे, उसे वह छुट्टी वाले दिन समस्तीपुर में ही करवाते थे। उन्होंने घर के पास ही विकेट बनवाया है। कभी वहां तो कभी समस्तीपुर स्थित लोकल क्रिकेट अकादमी में जाते थे।
वैभव अगले टी-20 वर्ल्ड कप में टीम में दिख सकते हैं कोच बोले की उम्मीद है कि वैभव अगले टी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया में दिख सकते हैं। जिस तरह से वह खेल रहे हैं और अपना पॉजिटिव एटीट्यूट दिखाया है। मुझे लगता है कि जल्द ही वह टी-20 में टीम इंडिया का हिस्सा बन सकते हैं
कोच बताते हैं कि वैभव और उसके पिता करियर को लेकर एकदम क्लियर थे कि क्रिकेट में आगे बढ़ना है। वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी खुद क्रिकेट खेलते थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में आगे नहीं बढ़ सके। फिर छोटे बेटे में अपना अधूरा सपना पूरा होते देखा, तो वैभव को क्रिकेटर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए उन्हें कई बार कर्ज भी लेना पड़ा। उन्होंने वैभव को पहले समस्तीपुर की अकादमी में ट्रेनिंग कराई, फिर मेरे पास लेकर आए, तब वैभव साढ़े आठ साल के रहे होंगे।
उनकी मां आरती जल्दी उठकर वैभव के लिए नाश्ता तैयार करती थीं। वैभव ने खुद मैच के बाद बताया कि वे रात 11 बजे सोती थीं और तीन घंटे के बाद उठ जाती थी, क्योंकि मुझे सुबह 4 बजे प्रैक्टिस के लिए निकलना होता था।(साभार)


