*प्रशांत रायचौधरी*
*खेल डेस्क।** आखिरकार शिखर धवन ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। करियर को और लंबा खींचना उनके लिए संभव नहीं था क्योंकि यशस्वी जयसवाल, शुभमन गिल व ईशान किशन जैसे कई युवा सितारे चमकने लगे हैं।*
जी हां अब गब्बर का बल्ला नहीं गरजेगा और न ही फील्डिंग करते हुए मूंछों में ताव देते हुए कैच लपकने के बाद जांघों में हाथ मारने का सिग्नेचर स्टाइल अब देखने को नहीं मिलेगा। *शिखर* गली और पॉइंट जैसे महत्वपूर्ण में जगह पर फील्डिंग करते थे। *दैनिक भास्कर चंडीगढ़* में कार्य करने के दौरान कई बार शिखर से मुलाकात हुई। *अत्रे मेमोरियल क्रिकेट* में भी उन्हें देखने का सौभाग्य मिला। हमेशा क्रिकेट के बारे में सोचा करते थे। यारों के यार लगे।
शिखर के बारे में आंकड़ों में न जाते हुए मैं उनकी क्वालिटी के बारे में बताना उचित समझूंगा
_*शिखर में ये विशेषताएं मुझे नजर आई*_
*धैर्य और संयम:* शिखर धवन अपनी पारी की शुरुआत में बेहद संयमित रहते हैं। वे पहले कुछ ओवरों में गेंद को अच्छे से देखते हैं और फिर आक्रामक अंदाज में खेलते हैं।
*आक्रामक बल्लेबाजी* : धवन का खेल आक्रामक है। वे जल्दी रन बनाने में सक्षम हैं और पावरप्ले में विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाते हैं।
*स्पिन के खिलाफ* *उत्कृष्टता* : शिखर धवन स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ बेहतरीन खेलते हैं। वे स्पिनर्स को फुटवर्क और शॉट्स के साथ बेअसर करने में माहिर हैं।
*विपरीत परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन* : धवन ने कई बार कठिन परिस्थितियों में भारत के लिए मैच जिताने वाली पारियां खेली हैं, खासकर आईसीसी टूर्नामेंट्स में उनका रिकॉर्ड शानदार है।
*फील्डिंग में दक्षता* : धवन न केवल बल्लेबाजी में माहिर हैं, बल्कि फील्डिंग में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है। वे गली और पॉइंट जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फील्डिंग करते हैं और कैचिंग और थ्रोइंग में कुशल हैं।


