टीम इंडिया मिशन वनडे वर्ल्ड कप के लिए तैयार है। भारत ने एशिया कप जीतकर सबसे बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए अपने इरादे साफ कर दिए हैं। इस टूर्नामेंट में मैनेजमेंट में उन सवालों के जवाब तलाशे जो टीम को लम्बे समय से परेशान कर रहे थे।
टॉप ऑर्डर फॉर्म में हैं, नंबर-4 और मिडिल ऑर्डर पोजिशन पर केएल राहुल, ईशान किशन के साथ श्रेयस अय्यर भी तैयार हैं। गेंदबाज पावरप्ले के साथ मिडिल ओवर्स में भी विकेट ले रहे हैं। टीम ने नॉकआउट स्टेज में चोक होने के सिलसिले को भी तोड़ दिया है।
ऐसे ही 5 फैक्टर्स इस स्टोरी में हम जानेंगे, जो भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनने का सबसे मजबूत दावेदार बना रहे हैं…
फैक्टर-1: सभी तेज गेंदबाज रिदम में
एशिया कप से पहले बड़ा सवाल था कि जसप्रीत बुमराह इंजरी के बाद खुद को साबित कर पाएंगे या नहीं। मोहम्मद सिराज कहीं अकेले तो नहीं पड़ जाएंगे। और क्या मोहम्मद शमी की जगह शार्दूल ठाकुर को प्लेइंग-11 में मौका देना ठीक रहेगा।
- बुमराह ने चोट के बाद शानदार वापसी की। पाकिस्तान के खिलाफ सुपर-4 स्टेज में पहली बार वनडे में बॉलिंग की। टीम को शानदार शुरुआत दिलाते हुए उन्होंने एक विकेट भी निकाला। फिर श्रीलंका के खिलाफ सुपर-4 और फाइनल दोनों ही मुकाबलों में भारत को पहला विकेट दिलाया।
- सिराज ने बुमराह का बखूबी साथ निभाया। फाइनल में तो उनके 6 विकेट ने श्रीलंका का सफाया कर दिया। उन्होंने विपक्षी टीम के बैटर्स पर दबाव बनाया और उन्हें रन बनाने से रोके रखा। सिराज ने टूर्नामेंट में भारत से सबसे ज्यादा 10 विकेट लिए।
- शार्दूल को टीम ने तीसरे तेज गेंदबाज के रूप में यूज किया। उन्होंने पाकिस्तान और नेपाल के खिलाफ एक-एक विकेट लिया। बांग्लादेश के खिलाफ मैच में 3 अहम विकेट लिए, उन्होंने हर बार मुश्किल सिचुएशन में विकेट निकाले।
फैक्टर-2: मिडिल ओवर्स में विकेट टेकिंग बॉलर्स
टीम इंडिया शुरुआती 10 ओवरों में तो विकेट निकाल कर दबाव बना रही थी, लेकिन मिडिल ओवर्स में गेंदबाज कुछ ज्यादा ही रन लुटा रहे थे। एशिया कप में इस समस्या को कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा के साथ हार्दिक पंड्या की बॉलिंग ने भी सॉल्व कर दिया।- कुलदीप ने एशिया कप के 4 मैचों में बॉलिंग की। नेपाल के खिलाफ उन्हें कोई विकेट नहीं मिला और फाइनल में वह एक ही ओवर फेंक सके। पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने बाकी 2 मैचों में 5 और 4 विकेट लिए। वह मिडिल ओवर्स में एक बार फिर टीम के ट्रम्प कार्ड बनकर उभरे।
- जडेजा ने ज्यादातर स्पिन पिचों का फायदा उठाया। नेपाल के खिलाफ उन्होंने 40 रन देकर 3 विकेट लिए। वहीं श्रीलंका के खिलाफ सुपर-4 के अहम मुकाबले में उन्होंने 10 ओवर में महज 33 रन दिए और 2 बड़े विकेट भी निकाले।
- हार्दिक ने फाइनल में 3 ही रन देकर 3 विकेट झटक लिए। उन्होंने सुपर-4 स्टेज में पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ भी टाइट बॉलिंग की। हार्दिक ने बेहद किफायती गेंदबाजी की, जिस कारण विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बढ़ता ही गया।
फैक्टर-3: टॉप ऑर्डर बल्लेबाज फॉर्म में लौटे
एशिया कप से पहले शुभमन गिल वेस्टइंडीज दौरे पर बुरी तरह फ्लॉप रहे थे। ऐसे में उन्हें ईशान किशन से रीप्लेस करने की बातें होने लगीं। विराट कोहली ने लम्बे समय से वनडे नहीं खेला था, वहीं रोहित शर्मा भी आउट ऑफ फॉर्म लग रहे थे।- शुभमन ने आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्तान-नेपाल के खिलाफ 2 फिफ्टी लगा दीं। रोहित शर्मा के साथ 2 सेंचुरी पार्टनरशिप करने के बाद उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में चेज करते हुए सेंचुरी लगाई। शुभमन टीम को जिता तो नहीं सके, लेकिन मुश्किल सिचुएशन में उन्होंने अपनी बैटिंग को साबित कर दिया।
- रोहित ने नेपाल के खिलाफ 74 और पाकिस्तान के सामने 58 रन बनाए। श्रीलंका के खिलाफ सुपर-4 स्टेज के मैच में मुश्किल पिच पर उन्होंने लगातार तीसरी फिफ्टी लगाई और 53 रन बनाकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई। रोहित लीडरशिप में भी पहले से ज्यादा शांत और टैक्टिकल नजर आने लगे हैं।
- विराट ने पाकिस्तान के खिलाफ 122 रन बनाकर एक बार फिर अपने बेस्ट फॉर्मेट के बारे में सभी को याद दिला दिया। बांग्लादेश के खिलाफ विराट नहीं खेले, फाइनल और नेपाल के खिलाफ उन्हें बैटिंग का मौका ही नहीं मिला।
फैक्टर-4: मिडिल ऑर्डर बैटिंग ऑर्डर की प्रॉब्लम खत्म
युवराज सिंह के रिटायरमेंट के बाद से ही टीम इंडिया वनडे में नंबर-4 की पोजिशन पर बैटर नहीं ढूंढ पाई। 2019 वर्ल्ड कप के बाद श्रेयस ने समस्या सुलझाई, लेकिन वह इंजरी के कारण ज्यादातर मैच नहीं खेल सके। इंजरी से वापसी कर रहे केएल राहुल का फॉर्म भी चिंता की बात थी।- राहुल शुरुआती 2 मैच नहीं खेले, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ पहले ही मैच में सेंचुरी लगाकर अपनी फिटनेस और फॉर्म दोनों को साबित कर दिया। उन्होंने सभी 4 मैचों में विकेटकीपिंग की, कई शानदार कैच पकड़े और कई बार कप्तान रोहित को रिव्यू लेने में भी हेल्प की।
- ईशान ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़े मैच में टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। उन्होंने 82 रन की पारी खेल टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया और बता दिया कि नंबर-4 की पोजिशन पर वह बेस्ट ऑप्शन हैं। उन्होंने सभी 6 मैच खेले और ओपनिंग से मिडिल ऑर्डर पोजिशन पर खुद को साबित किया।
- श्रेयस पाकिस्तान के खिलाफ एक ही मैच खेल सके, लेकिन वह भी इस मैच में कॉन्फिडेंट नजर आए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में अगर वह वापसी करते हैं तो भारत के लिए वर्ल्ड कप से पहले बहुत बड़ा पॉजिटिव होगा।
फैक्टर-5. ऑलराउंडर्स सबसे बड़ी जरूरत- पंड्या, जड्डू, अक्षर ने खुद को साबित किया
टीम इंडिया लम्बे समय से ऑलराउंडर्स रखने पर जोर दे रही है। इसी कारण हार्दिक और जडेजा दोनों प्लेइंग-11 का हिस्सा रहते हैं और नंबर-8 की पोजिशन पर भी टीम बैटिंग कर सकने वाले गेंदबाज को ही प्राथमिकता देती है। एशिया कप में इस सवाल का जवाब शार्दूल के साथ अक्षर पटेल से भी मिला।- हार्दिक ने बैटिंग और बॉलिंग दोनों में अपना शानदार फॉर्म दिखाया। पाकिस्तान के खिलाफ 87 रन की पारी ने उनकी मैच्योरिटी दर्शाई। वहीं श्रीलंका और पाकिस्तान के खिलाफ उनकी बॉलिंग ने टीम को बेहतरीन गेंदबाज भी दिया।
- अक्षर ने 2 ही मैच खेले, लेकिन दोनों ही मुकाबलों में उन्होंने अपनी बैटिंग से साबित कर दिया कि वे नंबर-8 पर बेस्ट चॉइस रहेंगे। श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने 26 और बांग्लादेश के खिलाफ 42 रन बनाए। बांग्लादेश के खिलाफ तो उन्होंने लगभग मैच फिनिश कर ही दिया था, लेकिन अहम मौके पर वे आउट हो गए। अक्षर की बॉलिंग जरूर चिंता की बात है। वह फिलहाल इंजर्ड भी है, जो भारत के लिए ज्यादा बड़ी समस्या हो सकती है।
- शार्दूल को नंबर-8 पोजिशन पर बैटिंग के लिए ही प्लेइंग-11 में जगह दी गई। बांग्लादेश और पाकिस्तान के खिलाफ उन्हें बैटिंग का मौका मिला, लेकिन वह कुछ खास नहीं कर सके। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वह अपनी बैटिंग साबित कर सकते हैं। बॉलिंग में जरूर उन्होंने 5 विकेट निकाले।
- जडेजा ने अपनी बॉलिंग को तो साबित कर दिया, लेकिन उनकी बैटिंग श्रीलंकन कंडीशन को भाप नहीं पाई और ज्यादातर मैचों में वह कुछ खास नहीं कर सके। हालांकि, इंडियन कंडीशन में वह अपनी बैटिंग को साबित कर चुके हैं, जो टीम के लिए अच्छी बात है।
