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सुशील दोषी को “लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड”

sports_master by sports_master
September 15, 2023
in क्रिकेट
0

vijay angnekar

Indore/पद्मश्री सुशील दोषी को मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन द्वारा उनके योगदान के लिए लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से अलंकृत किया गया है। यह हिंदी क्रिकेट कमेंट्री का सम्मान है।चार दशक पूर्व ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध मुंबई में टेस्ट मैच देख रहे  सुशील दोषी ने स्टेडियम में ही जब बॉबी तल्यार खान और विजय मर्चेंट को कमेंट्री करते हुए देखा तो तभी ठान लिया था  कि अब कुछ नहीं,  बस  कमेंटेटर ही बनना है।

  इंदौर आकाशवाणी के स्टेशन डायरेक्टर उनकी बात पर हंस पड़े थे, कमेंट्री वो भी हिंदी में। बहुत मुश्किल है। कैसे करोगे  हिंदी में क्रिकेट कमेंट्री ? आखिर शॉर्टपिच गेंद को क्या कहोगे, बैक फुट ड्राइव को क्या कहोगे, स्केवर लेग, ओवर द विकेट को क्या कहोगे। थर्ड मैन को क्या कहोगे – तीसरा आदमी। सुशीलजी का जवाब भी बहुत आसान था।  इन्हें कुछ और कहने की जरूरत ही नहीं, ये शब्द बने रहेंगे पर कहा हिंदी में जाएगा। क्या यह नहीं कह सकते कि शार्ट पिच गेंद आफ स्टंप के बाहर, बल्लेबाज बैकफुट पर गए , खूबसूरती के साथ खेला चार रन के लिए। बेहतरीन  क्रिकेटर रहने से उन्हे कमेंटरी  करने मे अच्छी मदद मिली। उन्हे  पता रहता था कि किस गेंद को बल्लेबाज कैसे खेल सकता है। 1968 में रणजी ट्राफी में सुशील दोषी ने पहली बार क्रिकेट कमेंट्री की थी। उसके बाद टेस्ट मैच, विश्व कप, एकदिवसीय मैच, लगभग हर बड़े टूर्नामेंट्स में सुशील दोषी ने कमेंट्री की। क्रिकेट की दुनिया में पिछले चार दशकों में कई रोमांचक  क्षणों के साक्षी रहे हैं सुशीष दोषी।

दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से मैं सुशील दोषी बोल रहा हूं। साफ आसमान, खुली हुई धूप, रह रह तक चलती हवा। भारत ने टॉस जीता है और बल्लेबाजी का फैसला किया है। बॉब विलिस की पहली गेंद गावस्कर को। आफ स्टंप से थोड़ा बाहर। गावस्कर ने गेंद को अच्छी तरह समझा, बैकफुट पर गए, शॉट के लिए जगह बनाई और कवर की तरफ खेला। पहला रन भारत के खाते में। पहला रन गावस्कर को। क्रिकेट में ये शब्द, ये अहसास श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते थे। यह क्रिकेट की कमेंटरी थी, जिससे लाखों करोड़ों लोग दशकों तक अभिभूत रहे। यह क्रिकेट कमेंट्री दर्शकों को रोमांचित तो करती ही थी , जिस तरह रेडियो के नाटकों में श्रोता परिकल्पना करता है, वैसे ही क्रिकेट के मैदान की पूरी गतिविधियां सुनने वालों की कल्पना में आती थी। यह कमेंटेटर और श्रोताओं के बीच एक अद्भुत तानाबाना था जिसमें वह जो आंखो देखा हाल सुनाता था, उससे श्रोताओं को यही लगता था कि वह कोई मैच देख रहे हैं। सुशील दोषी जैसे कमेंटटर ने इस कमेंट्री के लिए नए शब्द दिए, मुहावरे तलाशे। चौका छक्का या बोल्ड होने पर, या शतक बनने पर  क्रिकेट  पेवेलियन में दर्शकों के शोर, नारे, उत्साह की जो लहरें दौड़ती थी, वह लहर रेडियो के जरिए दूर दराज के कस्बों तक पहुंच जाती थी। चाय की दुकन हो, या पान की दुकान या लोगों के घर  हर जगह कमेंट्री की आवाज सुनाई देती थी। और अगर क्रिकेट में मायूसी का क्षण है तो वह भी रेडियो से चारों दिशाओं में पसरता था। भारत क्रिकेट में गहरे संकट में हो तो रेडियो में कमेंट्री हाल बताती थी। इस कमेंट्री का प्रताप है कि सुशील दोषी स्पिनर इरापल्ली प्रसन्ना से कम स्टार नहीं थे। उनकी शोहरत भी वही रही जो उस जमाने के किसी जानेमाने क्रिकेटर की रही है।

सुशील दोषी की कमेंट्री केवल खेल का वर्णन नहीं करती। यह कमेंट्री उस पूरे माहौल का शब्द चित्र खींचती हैं। एक बार राष्ट्रपति महोदय फिरोजशाह शाह कोटला मैदान में मैच देखने आए, सुनील गावस्कर ने तीन चौके लगाए और तीनों ही बार गेंद उस दिशा में गई, जहां देश के प्रथम व्यक्ति बैठे थे। रेडियो पर कमेंट्री आ रही थी गावस्कर का फिर शानदार स्ट्रेट ड्राइव चार रन के लिए। एक तरह से भारत के राष्ट्रपति को उनकी तरफ से यह अभिवादन। सुनने में रोमांचक। जो स्टेडियम में न भी रहा हो, उसे भी उतना ही रोमांच हुआ होगा। इसी तरह जोहांसबर्ग में जब नेल्सन मंडेला क्रिकेट देखने आए।  एक बेहतरीन स्ट्रोक से गेंद उस दिशा की ओर बिजली की गति से आई। बल्लेबाज को चार रन मिले और कमेंट्र्टर सुशील दोषी यही बता रहे थे कि मंडेला के स्वागत का इससे बेहतर तरीका और क्या होता। सुशील दोषी ने क्रिकेट की खास शैली विकसित की। प्रख्यात लेखक धर्मवीर भारतीजी ने एक बार कहा था कि सुशील दोषी ने अपनी कमेंट्री से हिंदी व क्रिकेट दोनों को लोकप्रिय बनाया । इस कमेंट्री को मुंबई में भी सुना गया, असम में भी। और विदेशो मे भी  कहां-कहां नहीं पहुंची यह कमेंट्री। सुंदर वाक्य, प्रवाह, उतार चढ़ाव, सहजता, स्पष्टता, सुंदर उच्चारण, और क्रिकेट का ज्ञान, स्मरण, घटनाओं को जोड़ने का कौशल ऐसे तमाम गुणों के साथ सुशील दोषी जब भी कमेंट्री करने के लिए कमेंटेटर बॉक्स में बैठे कमेंट्री जैसे गूंजने लगी।

 

क्रिकेट को केवल गावस्कर कपिल, सचिन, धोनी और विराट ने ही लोकप्रिय आकर्षक नहीं बनाया उसे हिंदी के इस  विश्व विख्यात कमेंटेटर ने भी आकर्षक बनाया है।

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Author: sports_master

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