प्रशांत रायचौधरी
क्रिकेट के इतिहास में यदि किसी एक खिलाड़ी को सम्पूर्ण खिलाड़ी (Complete Cricketer) कहा जाए, तो वह नाम है सर गारफील्ड “गेरी” सोबर्स। बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी, स्पिन गेंदबाजी और शानदार क्षेत्ररक्षण—क्रिकेट का शायद ही कोई ऐसा पक्ष रहा हो जिसमें सोबर्स ने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय न दिया हो। यही कारण है कि उन्हें आज भी विश्व क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर माना जाता है। आज उनका 89 साल की उम्र में दुखद निधन हो गया है। उन्हें शद्धांजलि…
28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में जन्मे सोबर्स ने मात्र 17 वर्ष की आयु में 1954 में वेस्टइंडीज़ के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। शुरुआत में वे मुख्यतः स्पिन गेंदबाज थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और तेज गेंदबाजी से भी दुनिया को चौंका दिया। वे बाएं हाथ के ऐसे खिलाड़ी थे जो आवश्यकता पड़ने पर तेज-मध्यम, ऑर्थोडॉक्स स्पिन और चिनामैन—तीनों तरह की गेंदबाजी कर सकते थे।
1958 में पाकिस्तान के विरुद्ध नाबाद 365 रन बनाकर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट का नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। यह रिकॉर्ड पूरे 36 वर्षों तक कायम रहा। 1968 में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ही ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बनकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की।
अपने 20 वर्ष लंबे टेस्ट करियर (1954–1974) में सोबर्स ने 93 टेस्ट मैचों में 8,032 रन (औसत 57.78) बनाए, जिसमें 26 शतक शामिल हैं। उन्होंने 235 विकेट भी लिए और 109 कैच लपके। उनकी यही बहुमुखी प्रतिभा उन्हें अन्य महान खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाती है।
सोबर्स 1965 से 1972 तक वेस्टइंडीज़ के कप्तान रहे। उनकी कप्तानी में टीम ने आक्रामक और आकर्षक क्रिकेट खेली। महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने भी उन्हें अपनी सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ टीम में स्थान दिया था। 1975 में उन्हें क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान के लिए ‘नाइटहुड’ की उपाधि से सम्मानित किया गया और बाद में वे बारबाडोस के राष्ट्रीय नायक भी घोषित किए गए।
17 जुलाई 2026 को 89 वर्ष की आयु में सर गारफील्ड सोबर्स का निधन हो गया। उनके निधन से क्रिकेट जगत ने एक ऐसे महान खिलाड़ी को खो दिया जिसने खेल की परिभाषा ही बदल दी। दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ियों, प्रशंसकों और संस्थाओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “क्रिकेट का महानतम ऑलराउंडर” बताया।
सर गारफील्ड (गेरी) सोबर्स केवल एक महान क्रिकेटर नहीं थे, बल्कि क्रिकेट उत्कृष्टता के ऐसे प्रतीक थे जिनकी उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।


