रियो ओलिंपिक में भारत के लिए कुश्ती में मेडल जीतने वाली पहलवान साक्षी मलिक ने संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ चुनाव के नतीजे आने के बाद खेल छोड़ने का फैसला किया है। 31 साल की साक्षी ने रोते हुए यह घोषणा की।नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के चुनावों में पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह ने एकतरफा जीत हुई है। अध्यक्ष पद के चुनाव में कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता अनीता श्योराण से मुकाबला था। इसे पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह की जीत की तरह ही देखा जा रहा है। चुनाव के नतीजे आने के बाद ओलिंपिक में भारत के लिए मेडल जीने वाली पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती छोड़ने का फैसला किया है।
साक्षी ने रोते हुए लिया संन्यास
साक्षी मलिक ने बजरंग पूनिया और बबीता फोगाट के साथ मिलकर बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ आंदोलन किया था। लेकिन अब उनकी करीबी के चुनाव जीतने के बाद साक्षी ने कुश्ती छोड़ने का फैसला किया है। मीडिया से बात करते हुए साक्षी ने रोते हुए कहा- हम 40 दिनों तक सड़कों पर सोए और देश के कई हिस्सों से बहुत सारे लोग हमारा समर्थन करने आए। अगर बृजभूषण सिंह के बिजनेस पार्टनर और करीबी सहयोगी को डब्ल्यूएफआई का अध्यक्ष रहता है तो मैं अपनी कुश्ती को त्यागती हूं। मैं आपको कभी वहां नहीं दिखूंगी।’
बृज भूषण शरण सिंह पर थे आरोप
18 जनवरी को भारतीय कुश्ती के तीन बड़े पहलवान बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और बबीता फोगाट ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ जंतर मंतर पर धरना शुरू किया था। उनके साथ कई और युवा रेसलर भी थे। पहलवानों ने उस समय के कुश्ती महासंघ अध्यक्ष के खिलाफ योन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ मुलाकात के बाद पहलवानों ने 21 जनवरी के दिन धरना खत्म कर दिया।
अप्रैल में दोबारा शुरू हुआ था धरना
बृजभूषण सिंह पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक समिति बनाई गई। समिति ने अप्रैल में अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इस बीच खबरें आईं कि रिपोर्ट में बृजभूषण निर्दोष पाए गए हैं। 23 अप्रैल को पहलवान दूसरी बार धरने पर बैठ गए। पहलवानों ने जंतर-मंतर में अपना अड्डा बना लिया और दिन-रात धरना जारी रहा।
संजय सिंह बोले- जिनको कुश्ती करनी है, वो कुश्ती करें
WFI का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद समर्थकों से घिरे संजय सिंह ने कहा ‘ जिनको कुश्ती करनी है, वो कुश्ती करें। जिनको राजनीति करनी है, वो राजनीति करें।’ उन्होंने कहा कि आगे बच्चों के लिए कैंप लगाए जाएंगे। उनका साल खराब नहीं होने दिया जाएगा। ओलिंपिक में जाने वाले पहलवानों की तैयारी कराई जाएगी।
WFI के नए अध्यक्ष संजय सिंह को ‘बबलू’ के नाम से भी जाना जाता है। वह यूपी रेसलिंग फेडरेशन और राष्ट्रीय कुश्ती संघ में पदाधिकारी रह चुके हैं। 2019 में WFI की कार्यकारी कमेटी में वह जॉइंट सेक्रेटरी चुने गए थे। संजय सिंह मूल रूप से यूपी में चंदौली एरिया के झांसी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता और दादा अपने इलाके में दंगल करवाते रहे। इसी वजह से संजय सिंह भी रेसलिंग से जुड़े रहे।
साक्षी मलिक के पास ओलिंपिक मेडल
साक्षी मलिक ने 2020 टोक्यो ओलिंपिक्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यह उनका पहला ओलिंपिक मेडल था। इसके अलावा साक्षी के पास कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन मेडल (गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज) और एशियन चैंपियनशिप्स में 4 मेडल ( 3 ब्रॉन्ज और एक सिल्वर) जीते है।
कोर्ट के स्टे हटाने पर हुए चुनाव
WFI के चुनाव 12 अगस्त को होने थे, लेकिन 11 अगस्त को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। कई महीने बाद अदालत के रोक हटाने पर आज 21 दिसंबर को चुनाव कराए गए। इसमें WFI का नया अध्यक्ष और एग्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर चुने गए। नई बॉडी चुनने के लिए सभी राज्यों के कुश्ती संघों के दो-दो सदस्यों ने वोट दिए।
पहलवानों ने बृजभूषण पर लगाए थे आरोप
देश के नामी रेसलर्स बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट समेत कई पहलवानों ने WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ संगीन आरोप लगाए थे। इन पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ दिल्ली में धरना तक दिया। पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद खेल मंत्रालय ने बृजभूषण शरण सिंह की अध्यक्षता वाले WFI को निलंबित कर दिया था।


