इसके बाद शास्त्री ने खुलासा किया कि हेड कोच पद के लिए जब उनका इंटरव्यू हुआ तब सौरव गांगुली वहां मौजूद नहीं थे। इससे बवाल खड़ा हो गया। शास्त्री ने कहा कि इस घटना से उन्हें अपमानित महसूस हुआ। बाद में गांगुली ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शास्त्री के निजी हमले से उन्हें बहुत दुख हुआ।
रिपब्लिक टीवी के साथ बातचीत में रवि शास्त्री ने कहा, ‘2014 में मैंने कमान संभाली। मैं टीम का डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट था। 2016 में उन्होंने कहा, नहीं, हमें अब किसी निदेशक की जरूरत नहीं है। आप मुख्य कोच पद के लिए आवेदन करें। मुझे योग्यता के आधार पर पद से हटाने का कोई कारण नहीं था। इसकी वजह कुछ और थी। इससे मुझे बहुत दुख हुआ। सच में, मुझे बहुत तकलीफ हुई। अगर मैं अपने करियर पर नजर डालूं, तो मुझे बहुत दुख हुआ क्योंकि आपने टीम को उस मुकाम तक पहुंचाने के लिए अपना दिल-जान लगा दिया था और आप देख सकते थे कि कुछ ही समय में उसके परिणाम दिखने लगे थे। और फिर आपको जाकर बाहर बैठना पड़ा।’
रवि शास्त्री ने कहा, ‘फिर मैं कमेंट्री पर लौट आया और खेल जारी रखा। मैंने कहा, ठीक है, डेढ़ साल का यह अनुभव अच्छा रहा। इसने मुझे बहुत कुछ सिखाया। इसने मुझे ड्रेसिंग रूम में वापस ला खड़ा किया। इसने मुझे सिखाया कि खिलाड़ी कैसे सोचते हैं। आधुनिक युग में, जेनरेशन जी कैसे सोचती है। और, बस इतना ही। यह एक बड़ा झटका था। लेकिन खैर, आपने इसे स्वीकार किया, आगे बढ़े, और फिर आपको दोबारा मौका मिला। और, जैसा कि क्रिकेट में होता है, जब आप वापसी करते हैं, तो और भी मजबूत होकर लौटते हैं। और जो हुआ वो इतिहास है।’ बाद में, शास्त्री 2017 से 2021 के बीच साढ़े चार साल तक भारत के मुख्य कोच रहे। इसी दौरान भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती और दूसरी बार भी ऐसा करने में सफल रहा।


