चेन्नई: एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन के 15 साल के उप-कप्तान वैभव सूर्यवंशी न केवल अपने बल्ले से, बल्कि अपने बेहतरीन क्रिकेटिंग सेंस और कप्तानी के दिमाग से भी महफिल लूट रहे हैं। कप्तान ईशान किशन के 270 रनों की बदौलत पहली पारी में 708 रनों का विशाल स्कोर बनाने के बाद, तीसरे दिन टी ब्रेक से ठीक पहले वैभव ने अपनी चतुर रणनीति से साउथ जोन के दो बड़े बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने में अहम भूमिका निभाई।
DRS पर वैभव का अटूट भरोसा
साउथ जोन की पारी के दौरान जब रिकी भुई क्रीज पर सेट हो चुके थे, तब तेज गेंदबाज मुकेश कुमार की लेग-साइड में जाती एक गेंद पर जोरदार अपील हुई। ऑन-फील्ड अंपायर ने इसे नकार दिया, लेकिन स्लिप में खड़े 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पूरी तरह आश्वस्त थे। वैभव ने बिना झिझक के कप्तान ईशान किशन को तुरंत DRS लेने के लिए मनाया। अल्ट्राएज में साफ देखा गया कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर कुमार कुशाग्र के दस्तानों में गई थी। BCCI ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस वीडियो को शेयर किया है।
स्टैंड-इन कप्तानी में मोहम्मद शमी पर खेला दांव
वैभव का असली कप्तानी दिमाग तब दिखा जब मैच के तीसरे दिन चाय काल से ठीक पहले ईशान किशन मैदान से बाहर गए और वैभव ने कार्यवाहक कप्तान की जिम्मेदारी संभाली। साउथ जोन का स्कोर जब 174/4 था, तब गर्दन की इंजरी के इलाज के बाद मैदान पर लौटे सीनियर तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को वैभव ने स्पेल का आखिरी ओवर फेंकने के लिए थमा दिया। यह फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। पिछली रणजी ट्रॉफी के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज स्मरण रविचंद्रन ने शमी की बाहर जाती गेंद पर बल्ला अड़ाया। इस बार अंपायर के ना आउट देने के बाद विकेटकीपर कुशाग्र के कहने पर वैभव ने फिर DRS लिया, जो एक बार फिर सफल रहा। साउथ जोन का स्कोर 176/5 हो गया।
सेमीफाइनल में भी DRS से पलटा था पासा
वैभव सूर्यवंशी का यह सटीक DRS सेंस कोई इत्तेफाक नहीं है। इससे पहले सेंट्रल जोन के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में भी वैभव ने आर्यन जुयाल (46 रन) के खिलाफ मुकेश कुमार की गेंद पर आखिरी सेकंड में DRS लेने के लिए कप्तान को राजी किया था, जहां अल्ट्राएज में एज पकड़ी गई थी। केवल बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी पर बात करते हुए भी वैभव ने हाल ही में बीसीसीआई के एक वीडियो में हंसते हुए कहा था, ‘विरोधी टीम का विकेट नहीं गिर रहा था, तो मुझसे दो-तीन ओवर गेंदबाजी कराई गई। ईशान भैया को लग रहा था कि वे रिस्क ले रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मैं विकेट-टेकर गेंदबाज हूं!’


