भारतीय महिला डबल्स जोड़ी त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में इतिहास रचते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक पदक के साथ ही इस भारतीय जोड़ी ने घरेलू सरजमीं पर विश्व चैंपियनशिप के हर सीजन में भारत के पदक जीतने के सिलसिले को बरकरार रखा है। दुनिया की 39वें नंबर की इस जोड़ी ने सेमीफाइनल मुकाबले में चीन की विश्व नंबर-1 और मौजूदा चैंपियन लियू शेंग शू और तान निंग को कड़ी टक्कर दी, हालांकि 1 घंटे 11 मिनट तक चले रोमांचक मैच में उन्हें 21-18, 13-21, 8-21 से हार का सामना करना पड़ा।
आक्रामक खेल और दर्शकों का जबरदस्त समर्थन
घरेलू दर्शकों के शोर और समर्थन के बीच त्रिसा और गायत्री ने पहले गेम में शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। त्रिसा जॉली ने फ्रंटकोर्ट और बैककोर्ट दोनों जगह से दमदार प्रदर्शन किया, जबकि गायत्री ने मिडकोर्ट पर बेहद सतर्क रहते हुए बेहतरीन खेल दिखाया। एक समय 15-18 से पिछड़ने के बाद भारतीय जोड़ी ने लगातार 6 अंक हासिल करते हुए पहला गेम 21-18 से जीतकर विश्व चैंपियन चीनी जोड़ी को हैरान कर दिया।
चीनी जोड़ी की वापसी और दूसरे गेम का मोड़
दूसरे गेम की शुरुआत में भी 12-12 की बराबरी तक कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इसके बाद चीनी जोड़ी ने अपनी रणनीति बदलते हुए लंबे रैलियों पर भरोसा दिखाया और भारतीय जोड़ी पर दबाव बनाना शुरू किया। भारतीय खिलाड़ियों से गलतियां होने लगे, जिसका फायदा उठाते हुए तान और लियू ने लगातार 8 अंक बनाकर दूसरे गेम को 21-13 से अपने नाम कर लिया और मैच में 1-1 की बराबरी कर ली।
निर्णायक गेम में मिली हार
तीसरे और निर्णायक गेम में चीनी जोड़ी ने अपना दबदबा पूरी तरह बनाए रखा। दूसरे गेम से मिली लय के दम पर उन्होंने शुरुआत से ही बढ़त बना ली, जिसका भारतीय जोड़ी के पास कोई जवाब नहीं था। त्रिसा और गायत्री तीसरे गेम को 8-21 से गंवा बैठीं। भले ही भारतीय जोड़ी फाइनल में जगह बनाने से चूक गई, लेकिन इस विश्व चैंपियनशिप में उनका सफर शानदार रहा और कांस्य पदक जीतकर उन्होंने वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।


