विजय रांगणेकर
*ये टी-20 लीग क्या गेंदबाजों के लिए कब्रगाह बन गई है?*
आईपीएल का रूतबा कई मायनों में अलग हैं. इस खेल में सारी शोहरत बल्लेबाज ले जाता है। क्रीज पर खड़े होकर चारों तरफ शॉट जमाते हुये उसका अंदाज किसी योद्धा जैसा लगता है। कैमरे भी विभिन्न कोणों से उनके शॉट्स को और दर्शनीय बनाते है। क्रिकेट के इस फार्मेट में असली आनंद तो चौकों छक्कों का ही रहता है। सब एक तरह से बल्लेबाजी को ही ग्लेमरस बनाते है। गेंदबाज अक्सर सहायक भूमिकाएँ निभाते दिखाते हैं। इतने ज्यादा रन बनते हैं की किसी टीम के लिए 200-250 रन बना लेना भी जीत की गारंटी नहीं रहती.
आधुनिक टी20 में सुस्ताने की कोई जगह नहीं है। आपको सिर्फ हिट करना होता है और यह ऐसा ही रहेगा। रिकॉर्ड बहुत तेजी से बन और टूट भी रहे हैं। आईपीएल 2023 तक किसी टीम द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर 263 रन था, जिसे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 2013 में पुणे वॉरियर्स के खिलाफ बनाया था। 10 साल तक यह रिकॉर्ड नहीं टूट पाया था, लेकिन आईपीएल 2024 में यह रिकॉर्ड टूट गया. सनराइजर्स हैदराबाद ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ एक पारी में 287 रन बनाकर क्रिकेट दुनिया में सनसनी फैला दी थी। इस सीजन में कई खिलाड़ी जिस तेजतर्रार खेल का प्रदर्शन कर रहे है। यह रेकार्ड भी अधिक दिनो तक टूटने से बचा नहीं रहेगा। 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने इस सीजन में 15 गेंदों में अर्धशतक जड़कर सनसनी मचा दी है। उन्होंने यह करिश्मा चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ किया और अपने ही रिकॉर्ड को बराबर किया। संजू सैमसन ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ सबसे तेज शतक नाबाद 115 नॉट आउट रनों की पारी खेली, जो इस सीजन का अभी तक का सबसे बड़ा स्कोर है। शुरुआती 3 ओवर्स में 58 रन बनाने का कमाल भी अभी देखा गया है। अब तक की बल्लेबाजी निडर इरादों और बहुत तेज गति से रन बनाने यानि पावर हिटिंग की शैली पर आधारित रही है। इस सीजन में बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट काफी ऊंचा रहा है, और युवा भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल की कमान संभाली है।
अब वह पुराना दौर ख़त्म हो चुका है जब टीमें एक या दो स्टार बल्लेबाजों पर निर्भर रहती थीं। अब तो बल्लेबाजों की कतार है जो नंबर 9 तक गेंदबाजों की पिटाई करने के लिए तत्पर रहती हैं। बल्लेबाजी के अनेक अविश्वसनीय रिकॉर्ड बन रहे हैं और टूट रहे हैं. रिकॉर्ड्स बनने और टूटने की प्रकिया में ये लीग गेंदबाजों के लिए कब्रगाह बन गई है. रनों के मामले में बल्लेबाज और टीमों के हिस्से में जहां शानदार और यादगार रिकॉर्ड्स आ रहे हैं. वहीं गेंदबाजों के हिस्से में घटिया रिकॉर्ड्स आ रहे हैं जिसे वे कभी याद नहीं रखना चाहेंगे. आलम यह है कि बड़ा से बड़ा गेंदबाज गेंदबाजी करने से कतरा रहा है. क्रिकेट के लिए ये शुभ संकेत नहीं है.
क्रिकेट का खेल बल्लेबाजों के साथ-साथ गेंदबाजों का भी है. जितने भी नियम बनाए जा रहे हैं वे गेंदबाजों के विरुद्ध ही होते हैं. इम्पैक्ट प्लेयर का रुल, ओवर रेट में कम होने पर 30 गज के बाहर कम फिल्डर रखने का रुल, बैटिंग पिच जैसी कुछ चीजे गेंदबाजों के खिलाफ हैं. इन नियमों का फायदा उठाकर बल्लेबाज तो हीरो बन जाता है. लेकिन गेंदबाज को लोग विलेन मानने लगते हैं. सच्चाई ये है कि गेंदबाज नियमों से बंधा हुआ है उसके पास खुद को बचाने के ज्यादा विकल्प नहीं हैं. ऐसे में कुछ नियम ऐसे भी होने चाहिए जो गेंदबाजों को फेवर करे. इससे हर मैच में गेंदबाजों पर होने वाला अत्याचार रुक सकता है और क्रिकेट का रोमांच बना रहेगा.


