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टोक्यो में मेडल चूका तो शूटिंग छोड़ने वाली थीं मनु:बेटी उदास न रहे इसलिए मां ने पिस्टल छिपाई

sports_master by sports_master
July 28, 2024
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टोक्यो में मेडल चूका तो शूटिंग छोड़ने वाली थीं मनु:बेटी उदास न रहे इसलिए मां ने पिस्टल छिपाई

फरीदाबाद/ये 2021 के टोक्यो ओलिंपिक की बात है। उस वक्त नंबर वन शूटर रहीं मनु भाकर क्वालिफाइंग राउंड में थीं। मनु को 55 मिनट में 44 शॉट लेने थे। तभी उनकी पिस्टल खराब हो गई। 20 मिनट तक वे निशाना नहीं लगा पाईं। पिस्टल ठीक हुई, तब भी मनु सिर्फ 14 शॉट लगा पाईं और फाइनल की रेस से बाहर हो गईं।

मनु भारत लौटी तो इतनी उदास थीं कि मां को फिक्र होने लगी। उन्होंने मनु की पिस्टल छिपा दी, ताकि उस पर नजर न पड़े और मनु दुखी न हो। मां सुमेधा कहती हैं, मैं मनु का मैच नहीं देख पाई थी। बाद में उसका वीडियो देखा तो बहुत दुख हुआ। मुझे लगा कि जब मैं दुखी हो रही हूं, तो मनु की क्या हालत हो रही होगी।’

हरियाणा के झज्जर की रहने वालीं उसी मनु भाकर ने भारत को पेरिस ओलिंपिक में पहला मेडल दिला दिया है। उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल की विमेंस कैटेगरी में ब्रॉन्ज जीता। वे शूटिंग में ओलिंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। उन्होंने फाइनल इवेंट में 221.7 पॉइंट्स लेकर तीसरा स्थान हासिल किया, मनु पॉइंट वन से सिल्वर मेडल चूक गईं। मनु ने क्वालिफाइंग इवेंट में 600 में से 580 पॉइंट्स हासिल किए और 45 शूटर्स में तीसरे नंबर पर रहीं।

मनु भाकर ने पहला ओलिंपिक मेडल जीता है। वे शूटिंग के तीन इवेंट में हिस्सा ले रही हैं।
मनु भाकर ने पहला ओलिंपिक मेडल जीता है। वे शूटिंग के तीन इवेंट में हिस्सा ले रही हैं।

पढ़िए, मनु के घर से ग्राउंड रिपोर्ट…

मां डॉक्टर बनाना चाहती थीं, टीचर ने कहा डॉक्टर को कौन जानेगा
मनु की मां डॉ. सुमेधा भाकर स्कूल प्रिंसिपल रही हैं। वे चाहती थीं कि बेटी डॉक्टर बने। स्कूल के फिजिकल टीचर ने मनु को स्पोर्ट्स में डालने के लिए कहा। टीचर ने कहा कि डॉक्टर को कौन जानेगा, अगर मनु देश के लिए मेडल जीतेगी, तो पूरी दुनिया उसे जानेगी। डॉ. सुमेधा को फिजिकल टीचर की सलाह ठीक लगी। यहीं से मनु की स्पोर्ट्स जर्नी शुरू हो गई।

बॉक्सिंग से शुरुआत की, आंख में चोट लगी तो छोड़ दी
मनु के पिता रामकिशन उन्हें बॉक्सर बनाना चाहते थे। मनु के बड़े भाई बॉक्सिंग करते थे। इसलिए मनु भी बॉक्सिंग करने लगीं। नेशनल स्तर पर मेडल भी जीते। एक दिन प्रैक्टिस करते वक्त मनु की आंख में चोट लग गई। आंख बुरी तरह सूज गई।

चोट लगने के बाद मनु ने बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया। इसमें मां का भी पूरा साथ मिला। मां ने मनु के पापा से साफ कह दिया कि जिस गेम में बेटी को चोट लगे, वो गेम नहीं खिलाएंगी।

उसके बाद मनु ने बॉक्सिंग छोड़ दी और मार्शल आर्ट्स में हाथ आजमाया। यहां मनु को लगा कि इस गेम में चीटिंग होती है। उन्होंने मार्शल आर्ट भी छोड़ दिया। आर्चरी, टेनिस, स्केटिंग की प्रैक्टिस शुरू की, मेडल भी जीते, लेकिन किसी में मन नहीं लगा।

ये फोटो मनु के फोटो एलबम से ली गई है। फोटो कराटे चैंपियनशिप के फाइनल की है।
ये फोटो मनु के फोटो एलबम से ली गई है। फोटो कराटे चैंपियनशिप के फाइनल की है।

स्कूल में शूटिंग शुरू की, पहले ही शॉट पर कोच बोले- ये लड़की मेडल लाएगी
मनु कई गेम में हाथ आजमा चुकी थीं, लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था। उनकी मां जिस यूनिवर्सल स्कूल में प्रिंसिपल थीं, वहां शूटिंग रेंज भी है। मां ने मनु को पापा के साथ शूटिंग रेंज भेजा। मनु ने पहला ही शॉट मारा था कि फिजिकल टीचर अनिल जाखड़ ने उनका हुनर पहचान लिया। उन्होंने मनु की मां से कहा कि मनु को इस गेम में टाइम देने दीजिए, ये देश के लिए मेडल लाएगी।

मनु की मां चाहती थीं कि बेटी डॉक्टर बने क्योंकि घर में कोई डॉक्टर नहीं था। वे कहती हैं, ‘मनु पढ़ने में अच्छी थी। खास तौर से बायोलॉजी में बहुत स्ट्रॉन्ग थी। मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए उसने कोटा में कोचिंग सेंटर भी देख लिया था।’

तभी फिजिकल टीचर अनिल जाखड़ की एंट्री हुई। उन्होंने मनु की मां से कहा कि आप कुछ दिन के लिए मनु को मुझे दे दो। मैं चाहता हूं कि वो शूटिंग करे। तब मनु की उम्र सिर्फ 14 साल थी।

उस वक्त रियो ओलंपिक-2016 खत्म ही हुआ था। मनु ने एक हफ्ते के अंदर पिता से शूटिंग पिस्टल लाने के लिए कहा। पिता ने बेटी की बात मानकर पिस्टल दिला दी। एक साल बाद ही मनु नेशनल लेवल पर मेडल जीतकर शूटिंग फेडरेशन के जूनियर प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट हो गईं। वहां इंटरनेशनल मेडलिस्ट जसपाल राणा का साथ मिल गया। जसपाल राणा ही अभी मनु के कोच हैं।

कोच जसपाल राणा के साथ मनु भाकर। जसपाल राणा भी चार बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
कोच जसपाल राणा के साथ मनु भाकर। जसपाल राणा भी चार बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

15 दिन की प्रैक्टिस में स्टेट कॉम्पिटिशन में जीता गोल्ड
मनु ने सिर्फ 15 दिन प्रैक्टिस की और महेंद्रगढ़ में हुए स्टेट कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने चली गईं। पहले ही कॉम्पिटिशन में गोल्ड जीतकर लौटीं। प्राइज में 4500 रुपए मिले। मनु काफी खुश थीं। पेरेंट्स को भी लगा कि वे शूटिंग में अच्छा कर सकती हैं।

शूटिंग शुरू करने के सिर्फ तीन साल बाद 2017 में मनु नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में उतरीं। उन्होंने ओलिंपियन और पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 हीना सिद्धू को हरा दिया। साथ ही 10 मीटर एयर पिस्टल में 242.3 का स्कोर कर नया रिकॉर्ड भी बना दिया। मनु ने चैंपियनशिप में 9 गोल्ड जीते, जो नेशनल रिकॉर्ड है।

मनु के लिए मां ने प्रिंसिपल की नौकरी छोड़ी
मनु की मां डॉ. सुमेधा बताती हैं, ‘2018 में मनु ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता तो लगा कि अब बेटी को मेरी जरूरत है। मैंने स्कूल की नौकरी छोड़ दी। मनु काे रेगुलर प्रैक्टिस के लिए दिल्ली में डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस के लिए ले जाने लगी।’

टोक्यो ओलिंपिक से बाहर हुईं, तो शूटिंग छोड़ने का इरादा कर लिया
टोक्यो ओलिंपिक में मेडल न जीत पाने का असर मनु की शूटिंग पर दिखने लगा था। एक वक्त ऐसा भी आया कि नेशनल टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा। मां डॉ. सुमेधा कहती हैं, ‘मनु बहुत हताश हो गई थी।’

‘एक दिन बोली कि मैं विदेश जाकर फैशन डिजाइनिंग और मार्केटिंग मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहती हूं। मैंने भी हामी भर दी और मनु की पिस्टल अलमारी में रख दी। मनु को शूटिंग से बहुत प्यार है। वो इससे बहुत दिन दूर नहीं रह पाई। वो फिर प्रैक्टिस पर जाने लगी। कोच जसपाल राणा को दोबारा जॉइन कर लिया। मनु का फैसला सही था। एक बार फिर वो ओलिंपिक में हिस्सा ले रही है।’

टोक्यो ओलिंपिक में पिस्टल खराब होने की वजह से मनु 12वें नंबर पर रहीं थीं। इस खराब एक्सपीरियंस के बारे में मनु से पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया- जो बीत गया, सो बीत गया। मैं कुछ बदल नहीं सकती हूं। बेस्ट पॉसिबल जो हो सकता था, मैंने उस टाइम पर भी ट्राई किया। मुझे लगता है कि पास्ट को पास्ट ही रहने दें तो अच्छा होगा।।’

पिस्टल खराब होने की वजह से मनु भाकर टोक्यो ओलिंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी थीं।
पिस्टल खराब होने की वजह से मनु भाकर टोक्यो ओलिंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट के फाइनल में नहीं पहुंच सकी थीं।

पिता बोले- बेटी मेडल जीत रही थी, लेकिन लाइसेंस के लिए परेशान होते थे
मनु के पिता रामकिशन भाकर बताते हैं, ‘शुरुआत में हमें पिस्टल के लाइसेंस के लिए बहुत चक्कर लगाने पड़े। मनु इंटरनेशनल लेवल पर मेडल जीत रही थी, फिर भी लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए मुझे पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब जाकर शूटर्स के लाइसेंस बनाने की प्रोसेस में काफी सहूलियत हुई है।’

2018 में मनु ने इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन, यानी ISSF में दो गोल्ड जीते थे। उन्होंने चैंपियनशिप में जिस पिस्टल से निशाना लगाया था, उसका लाइसेंस हासिल करने में मनु को ढाई महीने लगे थे। आमतौर पर ये लाइसेंस खिलाड़ियों को एक हफ्ते में मिल जाता है।

अगस्त 2020 में मनु भाकर को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
अगस्त 2020 में मनु भाकर को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

पेरिस में कम से कम एक गोल्ड जीतने का टारगेट
इस बार ओलिंपिक के लिए भारत के 21 शूटर्स ने क्वालिफाई किया है। इनमें मनु इकलौती शूटर हैं, जो तीन इवेंट में हिस्सा लेंगी। इनमें 10 मीटर एयर पिस्टल, 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड और 25 मीटर पिस्टल इवेंट शामिल है। टोक्यो ओलिंपिक में भी मनु तीन इवेंट में उतरी थीं, लेकिन कोई मेडल नहीं जीत पाईं।

टोक्यो ओलिंपिक की बुरी यादें छोड़कर अब मनु पेरिस में मेडल जीतने की तैयारी कर रही हैं। पेरिस जाने से पहले दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मेरी तैयारी अच्छी है। हर एथलीट का सपना पोडियम फिनिश करने का होता है। मेरा भी यही सपना है कि तीन या दो नहीं, तो कम से कम एक गोल्ड तो लेकर आऊं।

राजकिशोर /दैनिक भास्कर से साभार

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Author: sports_master

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